हड्डी में फ्रैक्चर होने के बाद उचित इलाज और आराम से हड्डी धीरे-धीरे जुड़ जाती है। लेकिन कई बार एक्स-रे में हड्डी जुड़ी हुई दिखाई देने के बावजूद हाथ या पैर हिलाने, चलने-फिरने या रोजमर्रा के काम करने पर दर्द महसूस होता है। ऐसी स्थिति में मरीज के मन में सवाल आता है कि फ्रैक्चर ठीक होने के बाद भी दर्द क्यों हो रहा है?
दरअसल, हड्डी जुड़ना और शरीर की सामान्य गतिविधियों का वापस आना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। फ्रैक्चर के बाद मांसपेशियों, जोड़ों और आसपास के टिश्यू को भी ठीक होने में समय लग सकता है।
फ्रैक्चर ठीक होने के बाद भी दर्द होने के संभावित कारण
1. मांसपेशियों में कमजोरी: लंबे समय तक प्लास्टर या बेड रेस्ट में रहने से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। इसके कारण हाथ-पैर हिलाने पर दर्द और थकान महसूस हो सकती है।
2. जोड़ों में अकड़न: लंबे समय तक किसी अंग को स्थिर रखने से आसपास के जोड़ों में अकड़न आ सकती है। इससे मूवमेंट करने में परेशानी होती है।
3. फिजियोथेरेपी की कमी: फ्रैक्चर के बाद सही समय पर और डॉक्टर की सलाह के अनुसार रिहैबिलिटेशन नहीं होने से सामान्य गतिविधियों में परेशानी बनी रह सकती है।
4. हड्डी का सही तरीके से न जुड़ना: कुछ मामलों में हड्डी अपेक्षित स्थिति में नहीं जुड़ती या जुड़ने में सामान्य से अधिक समय लगता है। इससे दर्द और मूवमेंट में समस्या हो सकती है।
5. आसपास के टिश्यू में चोट: फ्रैक्चर के दौरान लिगामेंट, टेंडन, नसों या अन्य आसपास के टिश्यू को भी नुकसान पहुंच सकता है, जिससे दर्द बना रह सकता है।
फ्रैक्चर के बाद कौन-से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?
अगर फ्रैक्चर ठीक होने के बाद भी निम्न समस्याएं बनी हुई हैं, तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए:
- हाथ या पैर हिलाने पर लगातार दर्द होना।
- प्रभावित हिस्से में सूजन बनी रहना।
- चलने या वजन उठाने में परेशानी होना।
- जोड़ों में अकड़न या मूवमेंट कम होना।
- प्रभावित अंग में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।
फ्रैक्चर के बाद दर्द का इलाज कैसे किया जाता है?
इलाज दर्द के कारण और फ्रैक्चर की स्थिति पर निर्भर करता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार एक्स-रे या अन्य जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं। उपचार में फिजियोथेरेपी, नियंत्रित एक्सरसाइज, दर्द कम करने वाली दवाएं और अन्य आवश्यक चिकित्सा शामिल हो सकती हैं।
मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के भारी गतिविधियां शुरू नहीं करनी चाहिए। सही समय पर रिहैबिलिटेशन से मांसपेशियों की ताकत और जोड़ों की गतिशीलता वापस लाने में मदद मिल सकती है।
फ्रैक्चर के इलाज के लिए कब ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से मिलें?
यदि हड्डी जुड़ने के बाद भी दर्द, सूजन या मूवमेंट में परेशानी बनी हुई है, तो इसकी जांच करवाना जरूरी है। समय पर परामर्श लेने से दर्द का वास्तविक कारण समझने और उचित उपचार योजना बनाने में मदद मिलती है।
Dr. Aditya Lakhotia, Orthopedic Doctor in Indore, से फ्रैक्चर, हड्डियों की चोट और मूवमेंट से जुड़ी समस्याओं के लिए परामर्श ले सकते हैं। उचित जांच और व्यक्तिगत उपचार योजना के लिए अनुभवी Orthopedic Doctor in Indore से संपर्क करें।
